राजनीतिक दल का मुखपत्र बनती जा रही है पत्रकारिता

पत्रकारिता आज के समय में बिकी हुई नज़र आ रही है कोई भी न्यूज़ चैनल हो या प्रिंट मिडिया से सम्बंधित सामग्रीः ऐसा लगता है की जैसे मिडिया किसी न किसी राजनितिक दल के लिए काम कर रही हो। आज निष्पक्ष समाचार दिखता ही नहीं किसी एक राजनितिक दल की बुराई करो और दूसरे की बड़ाई। मानों पत्रकार तो जैसे राजनितिक दल के कार्यकर्ता हो या यूं कहे जैसे राजनितिक दल मालिक हो और पत्रकार उनके कुत्ते जैसा राजनितिक दल चाहते है वैसा ये लिखते है या बोलते है( भोंकते हैं )

निस्पक्षता किसे कहते हैं शायद इन्हे मालूम ही न हो. शायद ये हम से कहना चाहते है की हम भी तो इंसान है हम किसी राजनितिक दल से क्यों नहीं जुड़ सकते। हम राजनितिक दल के प्रचार में भागीदारी क्यों नहीं कर सकते। हमें भी पैसे कमाने है हमें भी अच्छी लाइफ स्टाइल चाहिए। हम ने पैसे खर्च कर ये पत्रकारिता की पढाई की है और सिफारिस से पत्रकार बने है। हमें भी हक़ है हमें जीने दो और कमाने दो।

अपने वजूद के लिए लड़ती पत्रकारिता

आज मानों पत्रकारिता अपने वजूद के लिए लड़ रही हो चिल्ला चिल्ला कर पत्रकारों को बोल रही हो मुझे ढूंढो मैं आपके अंतरात्मा में बसी हूँ मुझे मरने मत दो। मुझे निष्पक्ष रहने दो तुम पत्रकार हो तुम मेरे मस्तिष्क हो मैं तुम्हारी आत्मा हूँ। अगर मैं मरी मेरा आस्तित्व न रहा तो तुम भि न रह पाओगे। पर पत्रकार तो शायद अपनी जिद पर अड़ा है। हे अंतरात्मा तू मेरे साथ रहे न रहे मैं तो राजनितिक दल के साथ रहूँगा ही क्यों की मेरा अस्तित्व तो राजनितिक दल के साथ ही है मैं उन्ही की बातें कर जिन्दा हु मैं उन्हें कैसे छोड़ सकता हूँ। मैं तुम्हे छोड़ सकता हु राजनितिक दल को नहीं


नंबर १ न्यूज़ चैनल बनाने की होड़ हो या किसी एक राजनीतिक दल से जुड़े रहने की होड़ आज देश जल रहा है देश के कई हिस्सो में जैसे आग सी लगी है रामनवमी के जुलुस ( शोभा यात्रा ) को ले कर साम्प्रदाइक हिंसा हो रही है राजनितिक दल एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे है कोई कहता है ये हिंसा त्रिमूल कांग्रेस के द्वारा कराइ जा रही है ताकि मुसलमानो को डराया जा सके की कही बीजेपी सत्ता में न आ जाये और उन्हें तृणमूल कांग्रेस का बिश्वासी मतदाता बनाया जा सके। ये हिंसा भारतीय जनता पाटी द्वारा कराइ जा जा रही है ताकि वो हिन्दुओ को एकजुट कर सके और आने वाले चुनावों में उसे लाभ हो। कोई कहता है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) इसका राजनैतिक फायदा उठाने में लगी है ताकि अगले चुनावों में मुस्लिम और यादव समीकरण बनाया जा सके। आसनसोल ( बंगाल ) जल रहा है और ममता बनर्जी राजनितिक गतिविधियों को दिल्ली में अंजाम दे रही है। हर न्यूज़ चैनल अपने अपने राजनैतिक दल को फायदा पहुंचने में लगा है कोई किसी राजनैतिक दाल से अपनी पुरानी दुश्मनी साध रहा है

कांग्रेस का मुखपत्र NDTV INDIA


मैं एक न्यूज़ चैनल का उदहारण देता हु आप कभी भी आजमा कर देख सकते है ऐसा लगता है जैसे ये न्यूज़ चैनल कांग्रेस पाटी का मुखपत्र हो। NDTV INDIA ये चैनल ऐसा देखना चाहता है जैसे सारे दंगे भारतीय जनता पाटी द्वारा प्रावोजित हो इनके एक पत्रकार है रविस कुमार जो की प्राइम टाइम में अक्सर देखे जा सकते है। ऐसा लगता है जैसे ये लोगो को भड़काना चाहते हो और सच्चाई उन तक पहुँचती ही न हो। जो मुझे पसंद है वो मैं बोलूंगा की पत्रकारिता। मैंने औरंगाबाद बिहार की रामनवमी शोभा यात्रा देखि इसलिए मैं ये लिख रहा हु शायद रविस कुमार जैसे पत्रकार और एंकर अपने मन से कहानी बना कर उसे बोलते हैं। आप किसी भी एक समुदाय और एक राजनितिक दाल के ऊपर आरोप लगा कर क्या आप जन भावनाएं भड़काने की कोशिश नहीं कर रहे है क्या यही पत्रकारिता है की किसी एक समुदय के बारे में लोगो को साम्प्रदाइक तनावों के समय बोला जाये। आसनसोल में हिन्दुओ को बेघर होना पड़ा और दंगो में किसी पाटी का हाथ हैं। राजनैतिक रोटियां सेंकी जा रही है। क्या है ये सब। राजनितिक पांटिया तो बयान बाजी कर रही है अपने फायदे के लिए ये तो समझ में आता है आप क्या कर रहे है ? जब बताये जा रहा की मामला शांति पूर्ण है तो आप इस तरह की पत्रकारिता से बचे की एक समुदाय की इतनी दुकानें जला दी गई। हिन्दू बेघर हो गए। मामला तनाव पूर्ण है। आप सौहार्द बनाने की कोशिश करे न की किसी एक पाटी के प्रचारक का काम कर और भी तनाव उत्पन करे

मुझे लगता है पत्रकारों पर अंकुश होना बहुत ही जरुरी है आप अपने विचारो को मत थोपिए सच्चाई परोसिये। जनता आप से बहुत उम्मीद लगये हुए है।
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